Friday,November 24, 2017
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समाचार - कला

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  • प्रेमक एहसास टुटल

    कहियो मैथिल झुकल त कहियो मिथिला झुकल । अहिना कैरते कैरते धर्ती प आसमान झुकल ।। ऐना अहाू नै करु जे मिथिला बदनाम भज्या । केकरो अगा शिर झुकाके नै चल परे ।। कहियो सासद्वारा पुतौह जारल गेल त कहियो देवरद्वारा भौजिके माइर

  • अस्पातलक हाल

    जनकपुरक अञ्चल अस्पातल बनल अछि एक पैघ सबाल समयमे ज नै ध्यान देबै त रुप एहो ललेत बिकडाल ।। फोहरमैला ब्यबस्थापन देखल एहि संस्थाक दोसर खराबी नहि भविश्यक प्रवाह अछि ककरो करय सब अपन मनमानी ।। स्वार्थक बिश पिनेसभ सेवक नहि लागय मन उपकारमे

  • देशले हामीलाई बोलायो

    जसले जति जे भनेपनि शासन गर्ने त उनीहरु नै छन् देशको ठुलो ओहदामा आसन गर्ने त उनीहरु नै छन् सारा शासन सत्ताको बागडोर छन् उनकै हातमा जनता जति लडे, मरेपनि छैनन् केही यहां साथमा ।।।। ठुलै आन्दोलन भयो ल्याउनलाई गणतन्त्र फेरी पनि उही खादैछन् देश

  • हम नेपाल गेल छलौ

    मध्य राति सपनामे हम नेपाल गेल छलौ छैठमे परिवारसँगे बड खुशी भेल छलौ ठकुवा भुसबा आरो सबकुछ लगेल छलौ फटकाके झोरा मुदा घरही बिसरिगेल छलौ माय,बाबु बहिन भाई कन्या छलीह साथमे छोट-छोट बातपर तैयो रुठिगेल छलौ प्रसाद खाइत काल निन्द खुलल जखने अपने ओ

  • आहाके याद अवैय

    हम आहाके लेल छी, आहा हमरा लेल कहै छलौ, अखनो याद अबैय ओ दिन सब जे बात कएने छलौ । एकै ठाम बैसक दुःख सुखके बात करै छलौ, कि भेल आहाके जे हमरा छोरिक चैल गेलौ ।। सपना सजौने रहि ओ विपनामे विसरिय गेलौ, संग छोरब नै कहने रहि किया छोरिय देलौ ।।।

  • यसरी मान्छौ यसपालिको दशै

    यसरी मान्छौ यसपालिको दशै

    बिगत लामो समयदेखी चल्दै आएको परम्परा/मान्दै आएको संस्कार यसपटक पनि बर्षारितुको समाप्ति र शरद रितुको आगमनसँगै लिएर आएको छ लिएर आएका छन् नयाँ उल्लास र उमङ्गहरु नव-नव प्रकारका दशै मनाउने तरिकाहरु । कसैको लागि फूलझै फक्रेको छ यो दशै कसैको

  • जीवनको पहिलो भेट

    हे प्रियसी जिन्दगीको पहिलो भेटमा बनाए मैले तिमीलाई आफ्नो जीवनको एक्लो साथी । भेटपछि संगै हिडे, संगै बसे गरे मनका कुरा दुख सुखमा साथ दिन्छु भन्थ्यो, बनायौ मलाई टुहुरा ।। हे प्रियसी जिन्दगीको पहिलो भेटमा बनाए मैले तिमीलाई आफ्नो जीवनको एक्ल

  • सम्प्रदायिक दङ्गा

    सम्प्रदायिक दङ्गा

    समाजमे गेलौ फुट देखलौ परिवारमे देखलौ आपसी द्वन्द्ध टोला-टापर स्तब्ध मौनता नेतासभ करे नारा बुलन्द । लिखबाक छल हमरा सामाजिक कथा जनता-जनार्दनके पीर आ ब्यथा खोजैत छलौ कोनो यथार्थ घट्ना भेटल ओत लुटपाट घट्ना । छोट-छोट बातक बिषय बनौने राजन

  • अब म लेख्दिन कविता

    अब म लेख्दिन कविता

    लेख्नसम्म लेखे मैले प्रवासमा कविता श्रिङ्गारको कविता उद्गारको कविता देशभक्तिको कविता त कहिले आफ्नै जीवनको वेदना र अभावको कविता परिणाम केही भएन निस्कर्श शुन्य छ प्रेमीहरु उस्तै छन् फूलहरुमा देखिदैन जीवनको अलौकिक रङ्ग देशका सिपाहीहरु समेत सजग

  • ठोकरा देलौ

    ठोकरा देलौ

    कोनाक हमरा आहाँ बिसैर गेलौ । अपन बनाक हमरा ठोकरा देलौं ।। गल्ती हमर आहाँपर आस क क, हँ“इस रहल छी आहँ हमरा नास क क । आब बुझैछी प्रेमक चोट सहास क क ।। कोनाक हमरा आहाँ बिसैर गेलौ । अपन बनाक हमरा ठोकरा देलौं ।। पेड सँ सुख्खल पात गिर जाइत अछि,

  • देश तरपैत अछि

    देश तरपैत अछि

    यी देश तरपैत अछि कोना संबिधान बिना जेनाकि माछ तरपैत अछि पाइन बिना । एक बेर चुनाव जितक गेल अछि नेता सरकारमे पागल बनाक छोइर देने अछि नेतासभ सम्पूर्ण जनताके ।। बेरि बेरि चेनाव क क कि कि भेल अछि फाइदा चुनाब लडैयबाला भ जाइत अछि चोर, डाकु आ ल

  • देशप्रतिका तिम्रा कर्तव्यहरू

    देशप्रतिका तिम्रा कर्तव्यहरू

    यो मृत्युलोकमा पनि तिमीले मृत्युमाथि बिजय पाउनुपाउनुपर्छ स्वतन्त्रताको जयघोस गर्दै पुर्खाहरुका सपना पुरा गर्न भएभरको सामार्थ्य लगाउनुपर्छ बर्शौदेखी कुहिएका छन् पुराना युगका खम्बाहरु यसलाई भत्काएर नया युग बनाउनुपर्छ तिमीले कायर भएर मर्नुहुदै

  • पुन: चमक्तै मिथिला राज

    जय मैथिल जय मिथिला बासी करु सब मिलिक जयकार बन्द हेतै कुशासन सबके पुन: चमक्तै मिथिला राज ।। सब ढेलफोरबा नेता तेहने लैय टिकट,कुर्सी, भत्ता पार्टी अते जे नाम याद नै जन्मल जेना गोबरछता ।। के रावण के अछि कुम्भकरण ककरा बुझी न्यायक भगवान झोरा भर

  • हिसाब जिनगीके

    हिसाब जिनगीके

    मार्च महिनाके उतरार्द्धमे आइ हम मृत्‍युके देखलौ सुनने छलौ/सोच्ने छलौ मृत्‍यु अत्यन्त सुन्दर/सरल होइछै मुदा यथार्थ बिलकुल फरक बिलकुल अलग पेलौ मृत्‍युक भ्यानक आ बिकडाल रुप देखि हम डरस पानि-पानि भगेलौ हम बेहोस भ गेलौ । आब एहिठाम - मृत्‍युक कट

  • आमा

    आमा तिमी नै हौ मेरो भगवान जन्म दियौ दुखगरि तर पाइनौ कुनै सम्मान संसार भरिको माया दियौ तिमीले त्यही साना साना हात समाएर हिंडन सिकायौ तिमीले आपूm रोएरपनि संतानलाई खुशी बनायौ मर्न तयार भयौ तर कहिले पाप नगर्ने बनायौ आमा तिमीलाई कसैले सम्मान