Friday,November 24, 2017
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कला

पुन: चमक्तै मिथिला राज

पुन: चमक्तै मिथिला राज

जय मैथिल जय मिथिला बासी
करु सब मिलिक जयकार
बन्द हेतै कुशासन सबके
पुन: चमक्तै मिथिला राज ।।


सब ढेलफोरबा नेता तेहने
लैय टिकट,कुर्सी, भत्ता
पार्टी अते जे नाम याद नै
जन्मल जेना गोबरछता ।।


के रावण के अछि कुम्भकरण
ककरा बुझी न्यायक भगवान
झोरा भरब रणनीति सबके
बस रामलीलामे बने राम ।।


हाथीसन दुमुहा दात छै
एक देखाबे दोसरस खाए
पीठ पछाडी छुरा मारत
मुहपर बाजत भाए यौ भाए
।।                                                              

आइ पद छै घुमिलेब दि
बढका बढका गाडीमे
छिनब जखने छुछुनर बनतै
छिछ्यैतै बारी-झारीमे ।।

माङ्गल भीख नै भेटतै ककरो
सभ जनता ज मिलबै आब
बन्द हेतै कुशासन सबके
पुन: चमक्तै मिथिला राज ।।

आबु किय नै मिलि बाटिक
एहि दानवसभके स्राद्ध करी
हक छिनब ज पाप थिक त
किय ने एक अपराध करी
।।

गरीबो दुखिया चैनस जियत
हेतै गाउ समाज उद्धार
बन्द हेतै कुशासन सबके
पुन: चमक्तै मिथिला राज
 
  ।।। विजय राज टाईगर


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